गर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं,
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ,
सबको प्यार देने की आदत है हमें,
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे,
कितना भी गहरा जख्म दे कोई,
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं,
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं,
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे,
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं,,,,,
"अगर रख सको तो निशानी, खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं"....
Saturday, April 24, 2010
अपने भी ख्वाब देखें बिखर तो नहीं गये
अपने भी ख्वाब देखें बिखर तो नहीं गये
जीते जी हम भी जिस्म में मर तो नहीं गये .........
हासिल तो हो गयी हैं हमें भी बुलन्दियाँ
नज़रों से अपनी हम भी उतर तो नहीं गये ..........
कोई हमें भुला के भी जीता है जिन्दगी
हम भी किसी की याद में मर तो नहीं गये ........
अफसोश क्या सरों से जो दस्तारें गिर गयीं
ये लोग इस पे खुश हैं की सर तो नहीं गये ........
क्यूँ इन दिनों नहीं है जमाने से कुछ गिला
औरों के साथ हम भी सुधर तो नहीं गये .......
तामीर कर दिखायेंगे फिर ताज हम नया
गो हाँथ काट गये हैं हुनर तो नहीं गया .......
तहजीब उस जहान की आने लगी इधर
आदाब इस जहाँ के उधर तो नहीं गये .......
छप्पर तो अपने जाने ही वाले थे अब के भी
आँधी में अब के बुढे शजर तो नहीं गये .....
जीते जी हम भी जिस्म में मर तो नहीं गये .........
हासिल तो हो गयी हैं हमें भी बुलन्दियाँ
नज़रों से अपनी हम भी उतर तो नहीं गये ..........
कोई हमें भुला के भी जीता है जिन्दगी
हम भी किसी की याद में मर तो नहीं गये ........
अफसोश क्या सरों से जो दस्तारें गिर गयीं
ये लोग इस पे खुश हैं की सर तो नहीं गये ........
क्यूँ इन दिनों नहीं है जमाने से कुछ गिला
औरों के साथ हम भी सुधर तो नहीं गये .......
तामीर कर दिखायेंगे फिर ताज हम नया
गो हाँथ काट गये हैं हुनर तो नहीं गया .......
तहजीब उस जहान की आने लगी इधर
आदाब इस जहाँ के उधर तो नहीं गये .......
छप्पर तो अपने जाने ही वाले थे अब के भी
आँधी में अब के बुढे शजर तो नहीं गये .....
Friday, April 23, 2010
मिली है ज़ेह्न—ओ—दिल को बेकली क्या
हुई है आपसे भी दोस्ती क्या
कई आँखें यहाँ चुँधिया गई हैं
किताबों से मिली है रौशनी क्या
सियासत—दाँ ख़ुदाओं के करम से
रहेगा आदमी अब आदमी क्या ?
बस अब आवाज़ का जादू है सब कुछ
ग़ज़ल की बहर क्या अब नग़मगी क्या
हमें कुंदन बना जाएगी आख़िर
हमारी ज़िन्दगी है आग भी क्या
फ़क़त चलते चले जाना सफ़र है
सफ़र में भूख क्या फिर तिश्नगी क्या
नहीं होते कभी ख़ुद से मुख़ातिब
करेंगे आप ‘द्विज’जी ! शाइरी क्या ?
हुई है आपसे भी दोस्ती क्या
कई आँखें यहाँ चुँधिया गई हैं
किताबों से मिली है रौशनी क्या
सियासत—दाँ ख़ुदाओं के करम से
रहेगा आदमी अब आदमी क्या ?
बस अब आवाज़ का जादू है सब कुछ
ग़ज़ल की बहर क्या अब नग़मगी क्या
हमें कुंदन बना जाएगी आख़िर
हमारी ज़िन्दगी है आग भी क्या
फ़क़त चलते चले जाना सफ़र है
सफ़र में भूख क्या फिर तिश्नगी क्या
नहीं होते कभी ख़ुद से मुख़ातिब
करेंगे आप ‘द्विज’जी ! शाइरी क्या ?
आँखों भर आकाश है बाहों भर संसार...
मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार
दुख ने दुख से बात की बिन चिठ्ठी बिन तार
छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार
आँखों भर आकाश है बाहों भर संसार
लेके तन के नाप को घूमे बस्ती गाँव
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव
सबकी पूजा एक सी अलग-अलग हर रीत
मस्जिद जाये मौलवी कोयल गाये गीत
पूजा घर में मूर्ती मीर के संग श्याम
जिसकी जितनी चाकरी उतने उसके दाम
सातों दिन भगवान के क्या मंगल क्या पीर
जिस दिन सोए देर तक भूखा रहे फ़कीर
अच्छी संगत बैठकर संगी बदले रूप
जैसे मिलकर आम से मीठी हो गई धूप
सपना झरना नींद का जागी आँखें प्यास
पाना खोना खोजना साँसों का इतिहास
चाहे गीता बाचिये या पढ़िये क़ुरान
मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ज्ञान
दुख ने दुख से बात की बिन चिठ्ठी बिन तार
छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार
आँखों भर आकाश है बाहों भर संसार
लेके तन के नाप को घूमे बस्ती गाँव
हर चादर के घेर से बाहर निकले पाँव
सबकी पूजा एक सी अलग-अलग हर रीत
मस्जिद जाये मौलवी कोयल गाये गीत
पूजा घर में मूर्ती मीर के संग श्याम
जिसकी जितनी चाकरी उतने उसके दाम
सातों दिन भगवान के क्या मंगल क्या पीर
जिस दिन सोए देर तक भूखा रहे फ़कीर
अच्छी संगत बैठकर संगी बदले रूप
जैसे मिलकर आम से मीठी हो गई धूप
सपना झरना नींद का जागी आँखें प्यास
पाना खोना खोजना साँसों का इतिहास
चाहे गीता बाचिये या पढ़िये क़ुरान
मेरा तेरा प्यार ही हर पुस्तक का ज्ञान
Subscribe to:
Posts (Atom)